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राजा ने राज्य के सबसे बड़े वैद्य, ज्योतिषी और जादूगरों को बुलाया। सबने अपने-अपने तरीके से राजकुमारी को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन कोई भी उसकी मुस्कान वापस नहीं ला पाया। राजकुमारी दिन-भर खिड़की के पास बैठी रहती, दूर आसमान को देखती और चुप रहती। महल के बगीचे, जहां कभी वह खेलती थी, अब सूने हो गए थे। एक दिन एक बूढ़ा साधु महल में आया और उसने राजा से कहा, “राजकुमारी की मुस्कान किसी बीमारी से नहीं, बल्कि उसके दिल की खालीपन से खोई है।” यह सुनकर राजा हैरान रह गया। साधु ने बताया कि राजकुमारी को सच्ची खुशी तभी मिलेगी जब वह दुनिया को समझेगी और दूसरों की मदद करेगी।
राजा ने भारी मन से राजकुमारी को आम लोगों के बीच भेजने का फैसला किया। राजकुमारी ने साधारण कपड़े पहने और एक सामान्य लड़की बनकर राज्य में घूमने लगी। उसने पहली बार देखा कि लोग कितनी मुश्किलों में जी रहे हैं—किसी के पास खाने को नहीं, कोई बीमार है, कोई अकेला है। धीरे-धीरे उसने लोगों की मदद करना शुरू किया—कभी भूखों को खाना देती, कभी बच्चों को पढ़ाती, कभी बुजुर्गों के साथ समय बिताती। इन सब कामों के दौरान उसके चेहरे पर हल्की-हल्की मुस्कान लौटने लगी, लेकिन अभी भी वह पूरी तरह खुश नहीं थी।
एक दिन उसने एक छोटी बच्ची को देखा, जो बहुत गरीब थी लेकिन फिर भी हमेशा हंसती रहती थी। राजकुमारी ने उससे पूछा, “तुम इतने दुखों में भी खुश कैसे रहती हो?” बच्ची ने जवाब दिया, “क्योंकि मैं जो है उसी में खुश रहती हूँ और दूसरों को खुश देखकर मुझे खुशी मिलती है।” यह सुनकर राजकुमारी के दिल में कुछ बदल गया। उसे एहसास हुआ कि सच्ची खुशी बाहर नहीं, बल्कि दूसरों की खुशी में छिपी होती है।
राजकुमारी महल वापस लौटी और उसने अपने अनुभव राजा और रानी के साथ साझा किए। उसने कहा कि वह अब समझ चुकी है कि असली खुशी क्या होती है। उसने राज्य में गरीबों के लिए भोजन, शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था शुरू करवाई। धीरे-धीरे पूरे राज्य में खुशहाली फिर से लौट आई। और एक दिन, जब राजकुमारी ने एक छोटे बच्चे को हंसते हुए देखा, तो उसके चेहरे पर वही पुरानी, चमकती हुई मुस्कान वापस आ गई।
उस दिन से आनंदगढ़ फिर से खुशियों से भर गया। लोगों ने सीखा कि सच्ची खुशी केवल अपने लिए जीने में नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीने में है। राजकुमारी की मुस्कान अब पहले से भी ज्यादा खूबसूरत थी, क्योंकि उसमें अनुभव, समझ और करुणा की चमक थी।
कहानी की सीख :-
सच्ची खुशी दूसरों को खुश करने में होती है। जीवन की असली मुस्कान सेवा और करुणा से आती है।